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कौन करे शनि महाराज के दर्शन और क्यों ?
इस धरती पर प्रतेक जीव अग्नि,आकाश ,जल,पृथ्वी ,जल वायु इन 5 तत्वों में से किसी एक तत्त्व की प्रधानता से निर्मित शरीर तथा अन्य ४ तत्वों की सहायता से संचालित होता है| प्रतेक तत्त्व की मात्रा का संतुलित होना स्वस्थ शारीर का कारन है किन्तु ये जरुरी नही की संतुलन सबका ठीक ही हो यहा इन् तत्वों का असंतुलित होना दिखाई देता है वही मानव देह में विर्क्तिया देखि जाती है शनि महाराज यायु तत्त्व ग्रह है जो जन्म कुंडली के 12 भावो में से तीसरे,छठे और ग्यारवे भाव को छोड़ कर बाकी सभी भावो में अशुभ फल देता है आपकी लगन कुंडली में अगर तीसरे,छठे और ग्यारवे भाव अगर शनि है तो आपको शनि महाराज लाभ ही लाभ देंगे तथा अगर कोई अग्नि तत्त्व ग्रह जैसे सूर्य या मंगल आपको हानि देरहे है तो उस स्थिति में शनि के अधिक प्रभाव को प्राप्त करने हेतु अगर आप शनि मंदिर जाते है तो आपको अग्नि तत्त्व दूषित ग्रहों से राहत मिलेगी शनि का संघ्राक्षन्न प्राप्त होगा तथा अगर इन तीन ग्रहों से अलग हटकर लगन कुंडली के बाकी किसी भी भाव में अगर शनि है तो उस स्थिति में शनि मंदिर जाने से आपको हानि ही हानि होगी|सिधांत है की अगर कोई आपका सहायक है तो उस के पास जाने से आपको सहायता मिलेगी तथा अगर कोई आपका शत्रू है तो उसके पास जाने से आपको हानि ही हानि होगी|
शनि की किसी से भी कोई दुश्मनी नही होती पूर्व जन्म में किये गाये पाप कर्मो के कारन ही हमे शनि का दूषित प्रभाव भोगना पड़ता है हमने पिछले लेखो में शनि महाराज को इमानदार चीफ जस्टिसकहा था मतलब की अगर हमारे कर्म गलत है तो शनि मंदिर जाने से शनि महाराज हमारे दंड को माफ़ नही करेगे बल्कि और जल्दी ही दंड देंगे क्युकी ये एक ऐसे ग्रह है जो चापलूसी,रिश्वत या शिफारिस कुछ नही मानते इश्वेरीये सत्ता के तहत इन्हें नव ग्रहो में प्रबल दंडाधिकारी के रूप में स्थापित किया गया है ऐसा भी नही कि हमारी लगन कुंडली में उपरोक्त तीन भावो को छोड़ कर शनि महाराज कही और है तो वो सदा हानि ही देंगे| गोचर और महादशा -अन्तर्दशा से भी शनि द्वारा दिए जाने वाले दंड का समय निर्धारित किया जाता है ,शनि के किसी शत्रू ग्रह की महादशा तथा चन्द्र कुंडली के गोचरगत तीन,छ ,ग्यारा भाव में मजूद होना शनि की क्रूरता को कम करता है इसके साथ ही मकर ,कुम्भ,बिरिष्चिक,तुला,मिथुन एवं कन्या राशी वालो के लिए भी शनि कठिन दंड नही देते इन लग्न वालो के लिए शनि मंदिर जाने से न लाभ है न हानि है,मकर और कुम्भ लग्न वाले जातको के तीन,छ,ग्यारा में अगर शनि हो तो उन्हें शनि दर्शन से अवश्य लाभ होगा इस स्थिति में शनि मंदिर जाने से पहले अपनी लगन कुंडली में शनि की स्थिति देखना अति आवश्यक है,सभी ग्रह सभी के अनिकुल नही होते और सभी ग्रह सभी के प्रतिकूल नही होते.इनकी अनुकूलता-प्रतिकूलता से ही हम शनि मंदिर जाने का या ना जाने का निर्णय ले सकते है न की आँखे बंद करके|.
प्राय देखा गया है कि मेष,सिंह,बिरिष्चिक लग्न वाले लोगो को शनि मंदिर जाने से अधिकतर नुक्सान ही होता है|

mesh lagna,singh rasi mai 2bhaw mai surya mangal,budh haai toi kya sani mandir mai ya sani ke lia kya kiya ja sakta hai khaskar sani ki utarti sani sadi sati adhaya mai
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